karva chauth
karva chauth | karwa chauth | karava chauth kyu manate hai | करवा चौथ क्यों मनाते है
करवा चौथ के बारे में बता रहे हैं आखिर क्यों किया जाता है करवा चौथ का व्रत और पूजा हम यहां बता रहे हैं इसकी कथा और इसकी मान्यताओं के बारे में जगह जगह अलग-अलग मान्यताएं हैं हमने यहां कुछ मान्यताओं का संग्रह किया है और इसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं |
हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह पर कार्तिक मास की चतुर्थी को मनाया जाता है यह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जो कि पूर्णिमा के 4 दिन बाद आती है |
इसमें मिट्टी के बने हुए पात्र का प्रयोग किया जाता है जिससे इस त्यौहार का पता चलता है मिट्टी के पात्र को करवा कहा जाता है | कुछ जगह पर मिट्टी के पात्र को सरगी भी बोला जाता है | उससे इसका नाम करवा चौथ पड़ा है याने के करवा मिट्टी के पात्र से लिया गया शब्द है और चौथ अर्थात चतुर्थी जो कि हमारे कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है |
इसमें चंद्रमा को जो जल अर्पित किया जाता है वह इसी मिट्टी के पात्र जिसे करवा कहते हैं के द्वारा किया जाता है आजकल के युग में कहीं-कहीं मिट्टी के बर्तन अगर उपलब्ध नहीं है तो तांबे के बर्तन का भी प्रयोग किया जाता है तांबे को शुद्ध धातु के रूप में देखा जाता है |
यह व्रत महिलाएं बड़े धूमधाम से मनाते हैं व्रत में अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं तथा पूरे दिन का उपवास रखती है उपवास में जल का सेवन भी नहीं किया जाता है यह सुहागिन महिलाएं एवं जिनके शादी तय हो चुकी है वह लड़कियां भी इस व्रत को करती हैं |
यह व्रत हिंदुस्तान में राजस्थान उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा गुजरात आदि में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है तथा इसको अन्य धर्म के लोग भी बड़े धूमधाम के साथ मनाने लगे हैं |
सुहागिन स्त्रियां करवा चौथ का व्रत रखती है | अपने पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं रखते हैं |
इस ग्रुप में पूरे दिन स्त्रियां सुबह से जब तक चंद्रमा ना निकल आए तब तक व्रत का पालन करती है और व्रत में पानी का सेवन भी नहीं करती है अर्थात यह व्रत निर्जला होता है जाने के इस व्रत में पानी का प्रयोग भी नहीं किया जाता और व्रत तोड़ने के बाद महिला है अपने पति के हाथ से पानी पीती हैं |
चंद्र उदय से पहले शिव परिवार का पूजन किया जाता है उसके बाद चंद्रमा को जल अर्पित किया जाता है चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद छलनी से चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं के बाद अपने पति के दर्शन उसी छलनी से किए जाते हैं पश्चात व्रत को अपने मनपसंद भोजन को खाकर पूर्ण किया जाता है | इस व्रत में महिला चंद्रमा के दर्शन के बाद अपना अपराध खोलती हैं पहले हो चंद्रमा के दर्शन करती हैं के पश्चात अपने पतिदेव के दर्शन करती हैं| इस तरह व्रत को पूर्ण माना जाता है |
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